Wednesday, November 27, 2013

ध्वनि ...

१.
चुप की जमीन पर रहने वाले ही
चुप्पियों का पता देते है ...


२.
चुप्पी ध्वनि की निद्रा है ...
मौन स्वर का जागरण ...


३.
और जागरण से पूर्व ...
उन्ही चुप्पियों की हथेलियों में
कुछ स्वप्न भी तो रहते ही है ...
हाँ ... वही तो है
जो जागरण का स्वर बुनते है ...


४.
देखो यह कितनी अच्छी सी बात है, कि
ध्वनियों की निद्रा के घर में ही सही, पर
स्वप्नों का हँसना -
उनके मरने से कहीं ज्यादा
आसान हुआ बैठा है ...



~~हेमा~~

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3 comments:

  1. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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  2. उत्कृष्ट प्रस्तुति.सुन्दर रचना .

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